Jan 16, 2026, 11:02
नई दिल्ली। एक मां की चीखें और सालों का इंतजार आखिरकार सच में बदल गया। जिस शव को पुलिस ने जानवर का बताकर मामले को रफा-दफा कर दिया था, वह उसी मां के बेटे का निकला। DNA रिपोर्ट सामने आते ही पूरा मामला पलट गया और सिस्टम की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
पीड़ित मां का आरोप है कि उसका बेटा जिंदा था, उसे बेरहमी से जलाकर मार दिया गया। घटना के बाद वह थानों के चक्कर काटती रही, रोती-गिड़गिड़ाती रही, लेकिन पुलिस ने यह कहकर उसे चुप करा दिया कि मिला हुआ शव किसी जानवर का है। शव को बिना पोस्टमॉर्टम और जांच के फेंक दिया गया।
DNA रिपोर्ट से खुलासा:
मामले में जब अदालत के आदेश पर DNA जांच कराई गई, तो रिपोर्ट ने सब कुछ साफ कर दिया। जिस अवशेष को जानवर बताया गया था, वह इंसान का शव था और DNA मैच होते ही यह पुष्टि हो गई कि वह लापता युवक का ही शरीर है।
मां का दर्द छलका:
पीड़ित मां ने कहा—
“मैं हर दिन रोती रही, मेरा बेटा मदद के लिए तड़पता रहा होगा। अगर समय पर सुनवाई होती, तो शायद आज मेरा बेटा जिंदा होता।”
पुलिस की भूमिका पर सवाल:
इस खुलासे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं—
बिना जांच शव को जानवर कैसे बताया गया?
पोस्टमॉर्टम क्यों नहीं कराया गया?
मां की शिकायतों को नजरअंदाज क्यों किया गया?